Tuesday, February 2, 2010

तुम्हारे लिए....

मालूम नहीं....
कब तक...
मैं यूंही लिखती रहूंगी.....
इन बेहिसाब शब्दों के साथ...
अपने सपने बांटती रहूंगी...
अब तुमसे ज्यादा....
ये शब्द मुझे समझ पाते हैं....
इसीलिए..
शायद...मेरी बात...
तुम तक..पहुंचाते हैं......
कल की ही तरह...
मैं आज भी लिखती हूं...
तुम्हारे लिए....
क्योंकि.....शायद
मेरी कलम आज भी तुम्हारे पास रेहन है...!!

29 comments:

हृदय पुष्प said...

अब तुमसे ज्यादा....
ये शब्द मुझे समझ पाते हैं....
........
शायद
मेरी कलम आज भी तुम्हारे पास रेहन है...!!
सारगर्भित - देखत में छोटे लगें घाव करें गंभीर -
हार्दिक शुभकामनाएं

परमजीत बाली said...

अपने मनोभावों को बहुत सुन्दर शब्द दिए हैं। बधाई।

dipayan said...

"अब तुमसे ज्यादा ....
ये शब्द मुझे समझ पाते है...."

बहुत सुन्दर शब्दो का चयन । बधाई ।

RaniVishal said...

अब तुमसे ज्यादा....
ये शब्द मुझे समझ पाते हैं....
Wah! kya kahane ..bahaut acchi lagi aapki rachana!!
Badhai!
http://kavyamanjusha.blogspot.com/

Udan Tashtari said...

बहुत उम्दा!

संजय भास्कर said...

बहुत सुन्दर शब्दो का चयन । बधाई ।

poemsnpuja said...

हाय राम अब ये आशिक लोग मुए दिल जिगर par कब्ज़ा रखते रखते कलम भी गिरवी रखने लगे. बड़े जालिम हैं. क्या किया जाए इनका!

दिगम्बर नासवा said...

अब तुमसे ज्यादा....
ये शब्द मुझे समझ पाते हैं....
इसीलिए..
शायद...मेरी बात...
तुम तक..पहुंचाते हैं......

काश वो भी शब्दों की भाषा समझ लें .......... बहुत खूब लिखा है .........

arjun said...

bahut khoob!!

Manish Kariya said...

exellent !!!

i dont have to express feelings for it...

Manish Kariya

Kishore Choudhary said...

कलम रेहन है... और लिखते जाना, बहुत अनूठा बिम्ब है

M VERMA said...

सुन्दर अभिव्यक्ति और भाव

आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल' said...

marmik

kimuza creations said...

waah ! Maashaa-Allaah !

Several tips said...

Your blog is good.

वेदिका said...

सुंदर काव्य है....छू जाने वाला
हार्दिक शुभकामनायें

सागर said...

अब तुमसे ज्यादा ....
ये शब्द मुझे समझ पाते है "

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति !!!!

Shivam said...

हार्दिक बधाइयाँ !!!!!!!!!!!सुंदर अभिब्यक्ति........

Kaviraaj said...

बहुत अच्छा ।

अगर आप हिंदी साहित्य की दुर्लभ पुस्तकें जैसे उपन्यास, कहानियां, नाटक मुफ्त डाउनलोड करना चाहते है तो कृपया किताबघर से डाउनलोड करें । इसका पता है:

http://Kitabghar.tk

Susheel Kumar Bhardwaj said...

JO dil se kuchh sochate hai vo jarur puri hoti hai
your blog is the nice

susheel kumar bhardwaj

वर्षा said...

लिखती रहो, बात पहुंचती रहेगी

Susheel Kumar Bhardwaj said...

Dost Banaye nahi Jate ban jate hai bas ese hi ek dusro ke shath dost mil jate hai

rajesh kumar sharma said...

bhut sahi likha hai aap ne
likhti raho yuhi thank you
mere blog http://gyansarita.blogspot.com/
par aap ka swagat hai

Susheel Kumar Bhardwaj said...

Your blog is the good

dimple said...

oh god..well written..beautiful words..

neel said...

aap likhti bahut achaha hai

parveen kumar snehi said...

behtareen ahbivyakti, badhai..

Susheel Kumar Bhardwaj said...

This is the nice blogs

PRATUL said...

kabhi-kabhi lagtaa hai aapko samajhne ke liye kaafi samay tak mashshakat karni padegi.

hindi saahitya me "shabdon kaa raakshas" naam gajaanan madhav muktibodh ko milaa hai. aapki rachanaaon ko dekhkar ek naam dene kaa man kartaa hai "shabdon kii chudel". maaf karnaa. vaise main shabdon kaa bhoot hun. bhaav ke star par aap "samvedanaa ki devi" hain.