Sunday, March 15, 2009

तेरी मुस्कुराहट......

मुस्कुरा....
तू जहां भी हैं....
सिर्फ मुस्कुरा...
क्योंकि
तेरी मुस्कुराहट...
मेरे बदन में....
तेरी आहट बन उतरती है....
तेरी मुस्कुराहट...
धूप की तरह....
मुझपर बिखरती है....
तेरी मुस्कुराहट...
हर रोज़,
मुझे छूकर गुज़रती है...
औऱ
किसी रुपहली बारिश की तरह
मुझ पर बरसती है......
तेरी ये मुस्कुराहट....
मुझे भीतर तक छूकर जाती है....
जब भी तेरे होठों पर आती है....
तू मुस्कुरा....

5 comments:

अनिल कान्त : said...

usko khush dekh kar sukoon milta hai .........aisa hi hota hai

Udan Tashtari said...

बेहतरीन!!!

mehek said...

sunder mithe muskurate bhav waah

Mired Mirage said...

सुन्दर ! किन्तु हरदम मुस्कराना तो मुस्कान का अवमूल्यन कर देगा व मुस्कराना भी एक काम हो जाएगा।
घुघूती बासूती

ओम आर्य said...

मेरी कल्पना में
तू कितना मुस्काती है
कहीं थक तो नहीं जाती है !!!