Tuesday, January 13, 2009

ब्लैक एंड व्हाईट ज़िंदगी और सपने.....ईस्टमैन कलर के

हम प्यार करते हैं एक दूसरे से और जीते हैं
हम जीते हैं और प्यार करते हैं एक दूसरे से
और जान नहीं पाते कि जीना क्या होता है
और जान नहीं पाते कि कौन सा दिन है
और जान नहीं पाते कि ये प्यार क्या है
- याक्स प्रीवेर्त
शायद यही सच है...लेकिन मैं जीना भी चाहती हूं और प्यार करते रहना भी........सिर्फ किसी के ओवर बोल देने से दुनिया खत्म नहीं हो जाती..........मेरे लिए मेरी दुनिया अभी भी वैसे ही है....उसने मुझसे पूछा ही नहीं......मेरी तरफ से सबकुछ खत्म.....और तुम्हारी तरफ से......?

फिर जब पूछा ही नहीं तो.....मुझे तो पूरा हक़ है.....उसे प्यार करने का,उसके साथ जीने का,उसके लिए जीने का.....लेकिन इस दरम्यान कई बातें रह गईं.....जो उसके संग करनी थी......
एक गुनगुनी धूप पीछे छूटी.....गुलाबी सर्दियां छूटी......,पहाड़ों पर....धुंध के बीच उसके साथ जाने का सपना पीछे छूटा......हरी घास के मैदान में लेटकर आसमान देखना और उसकी अपनी नदी किनारे मछली पकड़ते देखना.......कोहरे और धुंध के बीच उसके साथ लॉंग ड्राइव पर जाने का सपना और जिंदगी भर उसके साथ घूमते और उसकी गाड़ी में आबिदा परवीन को सुनने और सुनते ही रहने का सपना भी दूर कहीं छूट गया.......और इसके साथ ही कई अनगिनत हज़ारों,लाखों,करोंड़ों ऐसी ही हसरतें और सपने कहीं पीछे छूटते चले गए और मेरे कानों में गूंजती रही सिर्फ एक ही आवाज़...........हलो.....इट्स ऑल ओवर नाओ

मुझसे नहीं पूछा.....शायद ज़रुरत हीं नहीं समझी.....जो मैं कर सकती थी वो किया,रोई,गिड़गिड़ाई लेकिन वो ....एक शब्द.....ओवर....नहीं बदला
आज जब मैं ऑफिस के लिए निकलती हूं.....तब धूप गुनगुनी और ठंड गुलाबी महसूस नहीं होती...मेरे आस-पास कोई मद्धम संगीत नहीं बज रहा होता.....जो मुझे उसके होने का एहसास कराया करता था.........आज मेरे चेहरे पर वो रौनक नहीं आती.....जो उसके बारे में सिर्फ सोचने भर से आजाती थी.....मेरे सामने से वो गुज़रता है.........एक अजनबी की तरह.....उस अजनबी की तरह...जिससे मैं नाम नहीं पूछ सकती.....जिसको छू नहीं सकती.....जिससे बात नहीं कर सकती .....जिसे फोन नहीं कर सकती और जिसके कांधे का इंतज़ार नहीं कर सकती
ऐसा लग रहा है मैं अपाहिज हो गई हूं............

दर्द तो बहुत हो रहा है.....लेकन मैं रोना नहीं चाहती....ऐसा एहसास हो रहा है मानों मैं एक सूखा और खुरदुरा दरख्त हूं.....जिससे उसकी हरियाली छीन ली गई.....और जिसकी जड़ें ज़मीन में गहरे जाने के बजाए......वापस ऊपर आरही हैं...........क्या मैं गिरने वाली हूं....?
मालूम है मुझे....सारा कसूर मेरे सपनों का.....ब्लैक एंड व्हाईट ज़िदगी .....लेकिन सपने हमेशा...ईस्टमैन कलर के..............

लेकिन आज उसने एहसास कराने की कोशिश की है कि सपने सिर्फ सपने होतें हैं.........हकीकत नहीं.....पर मैं नहीं चाहती.....मेरे सपने मेरी दुनिया हैं.......मेरी ज़िदगी हैं......सपनों में तुम हो.....तुम्हारे लिए मेरे सपने हैं.....इसलिए सपनों की दुनिया झूठी नहीं.....क्योकि तुम झूठे नहीं हो.......तुम्हारे लिए मेरे सपने झूठे नहीं है.......बहुत खूबसूरत है मेरी ये दुनिया......बस एक बार मेरे साथ इसकी सैर पर चलो........वापस चलो....मेरे साथ चलो.....

4 comments:

P.N. Subramanian said...

हम पढ़ ही रहे रहे थे इतने में हमारा बेटा आया. क्या महुआ? मौसमी की बड़ी बहन है क्या? हमने कहा वो नहीं है, ये तनु है. तेरी समझ में नहीं आयेगा.हम भी समझ ने की कोशिश में लगे हैं. बहुत अच्छे. आभार..

डॉ .अनुराग said...

सपने हमेशा ईस्टमेन कलर के ही होते है ओर होने चाहिए ....वरना जिंदगी में कुछ रह नही जायेगा....कोई कहता था सपने अधूरी ख्वाहिश है...ओर कोई इन्हे सालो बाद पूरी होती ख्वाहिश...जो हमें जादू के आइने में दिखायी देती है...दरअसल जिंदगी ही एक आइना है जो रोज कई अक्स दिखाती है ये हम पर है की हम इसमे से कौन सा अक्स चुनते है

'Yuva' said...

आपकी रचनाधर्मिता का कायल हूँ. कभी हमारे सामूहिक प्रयास 'युवा' को भी देखें और अपनी प्रतिक्रिया देकर हमें प्रोत्साहित करें !!

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

सुंदर कहानी. दर्द ही हमारा सच्चा हमसफ़र है.

संसार दुःख का घर है और अशाश्वत है (गीता)
आप जो सपना देख सकते हैं, वह सब आप बन सकते हैं (वाल्ट डिज्नी)